kabhi haan kabhi na (1994)
jatin lalit
kumar sanu
shahrukh khan
ऐ काश के हम होश में अब आने ना पाएं
बस नग़में तेरे प्यार के गाते ही जाएं
खिलती महकती ये ज़ुलफ़ों की शाम
हंसते खनकते ये होठों के जाम
आ झूम के साज़ उठाएं
बस नग़में तेरे प्यार के गाते ही जाएं
हो बस अगर तुम हमारे सनम
हम तो सितारों पे रख दें कदम
सारा जहां भूल जाएं
बस नग़में तेरे प्यार के गाते ही जाएं
Sunday, October 23, 2005
ऐ काश के हम होश में अब आने ना पाएं
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1 comments:
अरे यार ये बहुत सही काम कर रहे हो तुम ।
मजा आ गया गीत पढकर ।
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