Rajneesh You might find George Michael’s blue- ‘armed with love’ on this site: http://www.utterlyrics.com/g/george-michael/unsorted/blue.html रजनीश मेरे चिट्ठे "महावीर" पर तुमने पूछा था कि हमारी संस्कृति तथा भाषा को कुचलने के लिए जिस पद्धति का नाम क्या था, उसका तो मुझे ज्ञान नहीं है, किंतु नीचे दी हुई पंक्तियां सम्भव है तुम्हारी जिज्ञासा में सहायक हो। "सन् १८१३ में ईस्ट इण्डिया कंपनी के बीस साल चार्टर का नवीकरण करते समय साहित्य को पुनर्जीवित करने, यहां की जनता के ज्ञान को बढ़ावा देने और विज्ञान को प्रोत्साहन देने के लिए एक निश्चित धनराशि मुहैय्या कराई गई। अंग्रेज़ी का संभवतः सब से खतरनाक पहलू है अंग्रेज़ी वालों में कुलीनता या विशिष्टता का दम्भ!" महावीर
महावीर जी, लिंक के लिए धन्यवाद। लेकिन मैं एमपीथ्री ढ़ूंढ़ रहा हूं। मिले तो बताएं। कोई ऊषा राजे सक्सेना जी हैं जो इंगलैंड में रहती हैं। उन्ही का लेख था अभिव्यक्ति पर। अफ़्सोस उस लेख को ढ़ूंढ़ पाने में असमर्थ हूं। उनको ईमेल भी लिखी थी, कोई जवाब नहीं आया। अभिव्यक्ति वाले शुशा फ़ांट इस्तेमाल करते हैं इस लिए सर्च करना भी मुश्किल है। नाम शायद कुछ मैकुले पद्धती था। गूगल में कोशिश की लेकिन नाकामयाब।
dear mahavir ji, raman and anup shukla ji. i am really thankful to you that you have researched this topic and have brought out the necessary information. raman, this is the right link. the essay from usha raje saxena was so long i could not find out this reference later. rest later.
6 comments:
Rajneesh
You might find George Michael’s blue- ‘armed with love’ on this site:
http://www.utterlyrics.com/g/george-michael/unsorted/blue.html
रजनीश
मेरे चिट्ठे "महावीर" पर तुमने पूछा था कि हमारी संस्कृति तथा भाषा को कुचलने के
लिए जिस पद्धति का नाम क्या था, उसका तो मुझे ज्ञान नहीं है, किंतु नीचे दी हुई पंक्तियां
सम्भव है तुम्हारी जिज्ञासा में सहायक हो।
"सन् १८१३ में ईस्ट इण्डिया कंपनी के बीस साल चार्टर का नवीकरण करते समय
साहित्य को पुनर्जीवित करने, यहां की जनता के ज्ञान को बढ़ावा देने और विज्ञान को
प्रोत्साहन देने के लिए एक निश्चित धनराशि मुहैय्या कराई गई। अंग्रेज़ी का संभवतः
सब से खतरनाक पहलू है अंग्रेज़ी वालों में कुलीनता या विशिष्टता का दम्भ!"
महावीर
महावीर जी, लिंक के लिए धन्यवाद। लेकिन मैं एमपीथ्री ढ़ूंढ़ रहा हूं। मिले तो बताएं।
कोई ऊषा राजे सक्सेना जी हैं जो इंगलैंड में रहती हैं। उन्ही का लेख था अभिव्यक्ति पर। अफ़्सोस उस लेख को ढ़ूंढ़ पाने में असमर्थ हूं। उनको ईमेल भी लिखी थी, कोई जवाब नहीं आया। अभिव्यक्ति वाले शुशा फ़ांट इस्तेमाल करते हैं इस लिए सर्च करना भी मुश्किल है। नाम शायद कुछ मैकुले पद्धती था। गूगल में कोशिश की लेकिन नाकामयाब।
Macaulay
http://cepa.newschool.edu/het/profiles/macaulay.htm
http://www.languageinindia.com/april2003/macaulay.html
उषा राजे सक्सेना का यह लेख तो नहीं खोज रहे थे?
http://www.abhivyakti-hindi.org/snibandh/britain_hindi/britain_hindi1.htm
dear mahavir ji, raman and anup shukla ji. i am really thankful to you that you have researched this topic and have brought out the necessary information. raman, this is the right link. the essay from usha raje saxena was so long i could not find out this reference later. rest later.
in fact i sent a mail to उषा राजे सक्सेना last year asking for more details of this. but never got a reply.
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