कुछ दिन पहले यहां (जर्मनी) के किसी टीवी चैनल पर बौलीवुड फ़िल्मों में संगीत (गानों) की भूमिका पर एक डाक्युमेंटरी दिखाई गई। इसमें कुछ बड़े अभिनेताओं (शा्हरुख खान), संगीत निर्देशकों (रहमान), गायकों (आशा भोंसले), choreographers (Shiamak Davar) तथा लेखकों की इंटर्वियू के साथ साथ आम लोग गाने गा कर झूमते हुए, मज़ा लेते हुए तथा अंताक्षरी खेलते हुए दिखाए गए। यहां हिन्दी फ़िल्मों का टीवी पर, तथा बड़ी मार्किटों में हिन्दी डीवीडी बिकने का चलन काफ़ी बढ़ रहा है।
कुछ बातें जो मुझे खटकती रहीं, वो ये, एक तो सभी ने इंटरवियू अंग्रेज़ी में दी। दूसरा, इस पौने घंटे की इंटरवियू में इन लोगों ने कम से कम 200 बार शब्द 'संगीत' का उपयोग किया। यहां लोगों को संगीत का बहुत शौक है, संगीत की वजह से बौलीवुड हौलीवुड का मुकाबला कर पा रही है, इत्यादि।
क्या गाने ही संगीत हैं? क्या ये गाने एक आम आदमी को संगीत के बारे में सही प्रकार से रूची जगाने में सक्षम होते हैं? कितनी ही टीवी प्रतियोगिताओं में सिर्फ़ गाने वाले प्रतियोगी ही बुलाए जाते हैं। कभी कुछ वादकों की प्रतियोगिता होते देखी है? क्या बोलों के बगैर संगीत नहीं होता? होता है। एक तो गाना, उससे भी मुश्किल एक दूसरे के साथ स्वर मिला के गाना, उससे भी मुश्किल कोई संगीत वाधय बजाना, उससे भी मुश्किल एक दूसरे के साथ स्वर मिला के वाधय बजाना। हम किस श्रेणी में आते हैं? शायद सबसे पहले वाली में।
Sunday, February 12, 2006
गाएं या बजाएं
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