Monday, June 23, 2008

एक सप्ताहांत गायकी के नाम

20-22 जून का सप्ताहांत में मैंने एक गायक-मण्डली (choir) के साथ म्युनिक के पास स्थित एक बड़ी झील Ammersee के पूरबी तट पर एक शांत जगह पर गुज़ारा। मण्डली के कई लोग तो शुक्रवार शाम को वहां पहुँच गये थे। यहां हम एक झोंपड़ी में रहे जहां खाना बनाने के लिये रसोई थी, टॉयलेट था लेकिन सोने के लिये अपना टेंट लेकर जाना पड़ा जो झोंपड़ी के बाहर खुली जगह पर लगाया जा सकता है। मेरे पास टेंट नहीं था लेकिन सोने के लिये एक खास बोरी थी जो काफ़ी गर्म होती है और उससे कहीं भी सोया जा सकता है। वह चारों ओर से बंद हो जाती है। हमने वहां जाकर बाहर खुले में बैठकर खाना खाया जो साथ लेकर आये थे, फिर देर रात तक बातें करके सो गये। अगले दिन सुबह मण्डली के बाकी लोग भी आ गये, और साथ में कॉफ़ी और खाने पीने का सामान लाये। नाश्ते के बाद हम अभ्यास करने बैठ गये और शाम सात आठ बजे तक अभ्यास करते रहे। बीच में दो घंटे के विराम में चाय कॉफ़ी पी और झील में नहाये। सौभाग्य से इस सप्ताहांत अच्छी गर्मी पड़ी और ये झोंपड़ी बिल्कुल झील के तट पर पड़ती है। इसलिये लोगों ने खुली झील में तैरने और स्नान करने का खूब आनंद लिया। फिर रात का खाना इकट्ठे खाया। रात को मौसम थोड़ा ठंडा हो गया तो हम बाहर आग जलाकर आस पास बैठेकर देर तक गाने गाते रहे। अगले दिन भी नाश्ता करके हमने दो तीन घंटे अभ्यास किया। उसके बाद बाकी का बचा हुआ खाना खत्म किया। फिर लोगों ने झील में नहा कर वापस जाना आरंभ कर दिया। हम भी करीब तीन बजे वापस चल दिये। ये एक अच्छी छुट्टी थी। हां, इसके लिये मुझे परिवार को घर पर छोड़ कर आना पड़ा। लेकिन ये मण्डली आने वाले शनिवार को एक बड़े कार्यक्रम में पर्दर्शन करने जा रही है। उसके लिये अच्छी तैयारी हो गयी।

ये गायक-मण्डली 1998 में फ़्रांस में वैश्वीकरण के विरोध में शुरु हुयी एक ATTAC नामक संस्था का हिस्सा है (जर्मन वेबसाईट http://www.attac.de/)। अब इसके 50 देशों में लगभग 90000 सदस्य हैं। इसके अधिकतर सदस्य वृद्ध लोग हैं, लेकिन कुछ युवा लोग भी हैं। यहां अधिकतर वैश्वीकरण या पूंजीवाद के विरोध में गाने गाये जाते हैं। आश्चर्य इस बात का है कि इन मुद्दों पर इतने गाने बन चुके हैं, वो भी लिखित रूप में कि क्या कहने। अधिकतर गाने जर्मन भाषा में हैं, लेकिन साथ ही इतालवी, जापानी, ईरानी भाषा में भी कुछ गाने हैं। मैं तीन चार सप्ताह पहले ही इसमें शामिल हुआ हूँ। मैं संगीत और गायकी को थोड़ी गहराई से सीखना चाहता था और संगीत को लेकर जीवन में थोड़ा अनुशासन चाहता था, तो अचानक कहीं से इस गायक-मण्डली के बारे में पता चला। choir एक ऐसा समूह होता है जिसमें बहुत से लोग तीन या चार टुकड़ियां बनाकर लिखित संगीत को पढ़कर गाते हैं। अधिकतर ये संगीत खासकर choir के लिये लिखा जाता है जिसमें हर टुकड़ी एक ही ताल में अलग झलग स्वरों में गाती है जिससे गानों में अजीब सी कशिश पैदा होती है। इसकी एक और खास बात ये है कि इसमें कोई भी थोड़े अभ्यास के बाद गा सकता है, जबकि भारतीय संगीत में गुरू से सीखकर, बहुत रियाज़ करके अकेले गाने का रिवाज़ है। इससे एक दूसरे की आवाज़ सुनकर पहचानने, सीखने का मौका मिलता है, टीम की भावना उत्पन्न होती है। मेरा भी सपना है कि हिन्दी गानों के लिये लिखित रूप में choir के फ़ार्मेट पर फ़ाइलें तैयार करूँ ताकि हर कोई तकनीक बद्ध तरीके से गाना सीख सके। अभी दुविधा ये है कि कोई नोटेशन वाला प्रोग्राम युनिकोड का समर्थन नहीं करता।

इस झोंपड़ी का नाम Otto-Huber-Hütte है। यह Breitbrunn नामक गाँव के पास पड़ती है। यह झोंपड़ी 1946 - 1947 में फ़ासी वाद के विरुद्ध लड़ने वालों और नाज़िओं द्वारा पीछा किये जाने वालों द्वारा बनाई गई थी। हिटलर के सत्ता में आने से पहले ये लोग इस जगह के करीब मिला करते थे। ये वे लोग थे जो नाज़ियों के नजरबन्दी-शिविरों से ज़िंदा बच गये थे। इनमें से कुछ लोग तो बारह वर्ष तक इन शिविरों में रहे। रिहा होने के बाद इन्हें सरकार से कुछ पैसा मिला जिससे इन्होंने यह झोंपड़ी बनाई। यहां ट्रेन, बस आदि से नहीं पहुँचा जा सकता। सबसे पास लोकल ट्रेन का स्टॉप कोई आठ किलोमीटर दूर पड़ता है। अधिकतर लोग अपनी गाड़ी से आये थे। कुछ लोग लोकल ट्रेन से आये थे, और बाकी का रास्ता उन्होंने साईकल से तय किया।

otto huber hütte: ये जगह यहां पड़ती है (बायीं ओर झील है)-

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एल्बम देखें-
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Monday, June 16, 2008

शाँति भंग करने वाले आ गये

14 जून को म्युनिक शहर के 850वें जन्मदिवस पर हमारे percussion group 'Münchner Ruhestörung' ने ब्राज़ील, अफ़्रीका और दक्षिण अमरीका के कुछ ताल पेश किये जैसे Samba, Timbalada, Steak Hands वगैरह। ये समूह 22 अक्तूबर 1983 को NATO के विरोध में एक पर्दर्शन करने के लिये वजूद में आया और तब से चल रहा है। मैं कुछ ही महीने पहले इसमें शामिल हुआ हूँ। वाक्याँश 'Münchner Ruhestörung' का अर्थ है 'म्युनिक की शाँति भंग करने वाले'। यानि इसमें उपयोग होने वाले वाद्य जैसे Surdo, Timba, Tambourim, shaker आदि इतने ऊँचे बजते हैं कि बिना किसी खास मौके के ऐसे ही सड़क पर बजाना असंभव है। हम किसी खास जगह पर सप्ताह में एक बार अभ्यास करते हैं।

फोटू इधर हैं-
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वीडियो इधर हैं





Friday, June 06, 2008

हमारा तीसरा प्रोग्राम

31 मई को Gasteig के बाहर हमारे ग्रुप का कार्यक्रम।



एल्बम ज़रूर देखें:

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